था तुम्हें मैंने रुलाया! - हरिवंशराय बच्चन हा, तुम्हारी मृदुल इच्छा! हाय, मेरी कटु अनिच्छा! था बहुत माँगा ना तुमने किन्तु वह भी दे ना पाया! था तुम्ह…
और पढ़ेंहम और सड़के.....केदारनाथ अग्रवाल.....hindi poem सूर्योदय की सड़कें, जिन पर चलें हम तमाम दिन सिर और स…
और पढ़ेंसिक्के की औक़ात एक बार बरखुरदार! एक रुपए के सिक्के, और पाँच पैसे के सिक्के में, लड़ाई हो गई, पर्स के अंदर हाथापाई हो गई। जब पाँच का सिक्क…
और पढ़ेंमैं नीर भरी दुख की बदली! स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा क्रन्दन में आहत विश्व हँसा नयनों में दीपक से जलते, पलकों में निर्झारिणी मचली!…
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